दस गुणा अधिक गति से कैसे पढाई करे?

How to learn 10 times faster?

Sun Dec 7, 2025

गति से पढाई !

SelfStudyLearningMethod.com: आप सोचेंगे क्या ये सच में पॉसिबल है? क्या मै ऐसा कर पाऊंगा? तो चलिये दोस्तो जानने की कोशिश करते है क्या मुमकिन है.
हम पढाई करने बैठते है और जैसे किताब खोलकर कुछ लाईने पडणे लगते है तो हमे बहुत सारी चीज है डिफिकल्ट आती है जैसे कि बोरिंग लगेगा, इंटरेस्ट नही आयेगा, सब्जेक्ट मे घुस नही पायेंगे जल्दी, बहुत टाईम लगेगा, फिर थोडा थोडा कभी भाषा की दिक्कत व वोकॅबलरी कम पडती है तो कभी चॅप्टर की रचना बिलकुल भी समझ मे नही आती है और बहुत सारी परेशानिया हमे आती है. तो चलिये देखते है क्या ऐसा मुमकीन है?
पहेले समजते है कि पढणा मतलब क्या? तू दोस्तो आपको हमेशा लगता है की जो पढ रहा हूँ याद रहना चाहिए परीक्षा मे लिखने आना चाहिए answers/ MCQ करते आने चाहिये तो उसका मतलब पढना है.
पढ़ना मतलब जो भी कांसेप्ट पढ़ रहे हैं, वह समझ में आ जाने चाहिए। सिर्फ इंफॉर्मेशन इकट्ठा करना, जानकारी जुटाना, यह पढ़ना नहीं होता है। और जो जानकारी जुटाई, वह याद करके परीक्षा में लिखना, इसे पढ़ाई नहीं कहते हैं। पढ़ना मतलब कांसेप्ट पूरा समझ में आ जाना चाहिए। कांसेप्ट समझना एग्जाम के लिए जरूरी नहीं, रोजमर्रा की जिंदगी में काम में आना चाहिए, एप्लीकेशंस डेवलप करने के लिए या एप्लीकेशंस काम कैसे करते हैं, वह समझने के लिए। हमारे शिक्षा के तीन स्तर होते हैं: सबसे पहला प्राथमिक स्तर होता है निचला स्तर, है कांसेप्ट समझ में आ जाना चाहिए। दूसरा स्तर है हमें कांसेप्ट समझने के बाद एप्लीकेशंस समझ में आ जाना चाहिए। जिससे कि हम खुद भी वह एप्लीकेशन अप्लाई कर सके या डेवलप कर सके। और उसके बाद आज तक जो भी उपयोग या एप्लीकेशंस डेवलप किए गए, उसके बावजूद अगर कुछ समस्याएं बचती हैं, तो उन समस्याओं का निपटारा करना या उसे सुलझाने के लिए नए एप्लीकेशंस डेवलप कर पाना उसके लिए संशोधन कर पाना यही लर्निंग का सबसे तीसरा और ऊंचा स्तर है।

अभी हमने समझ लिया, पढ़ना क्या है। तो अभी समझते हैं कि 10 गुना अधिक गति से कैसे पढ़ा जाए। तो दोस्तों, तीन चीजें हैं: पहली, हमारे पढ़ते वक्त जो भी समस्याएं, दिक्कतें आती हैं, आठ से नौ दिक्कतें हैं, उसे हमें सुलझाना पड़ेगा एक के बाद एक। दिक्कतें कुछ इस तरह की आती हैं कि जो पढ़ रहे हैं, तो उसका क्या फायदा, वह हमें समझ में नहीं आता। कभी पढ़ाई में मन लगने के लिए बहुत समय लग जाता है, कभी हमें भाषा बहुत मुश्किल लगती है, कभी चैप्टर की बनावट बहुत मुश्किल से समझ में आती है। हमारी कुछ आदतें होती हैं, या हमारे कुछ मान्यताएं होती हैं, वह हमें आड़े आती हैं। और इन सबको हमें सॉल्व करना होता है। इन समस्याओं पर हमें मात करनी पड़ती है। यह पहला स्टेप है। दूसरा स्टेप …अभी तक जितने। सीखने की प्रक्रिया यह सोच-विचार का काम है। यहां क्रिटिकल थिंकिंग, यानी कार्य-कारण भाव वाली सोच, और लॉजिकल रीजनिंग, मतलब तार्किक बुद्धि, इन चीजों की आवश्यकता होती है। यह अगर डेवलप्ड है, तो आपको कांसेप्ट जल्दी समझ में आएगा। तो योग्य एटीट्यूड क्या है, इसके घटक क्या हैं, और योग्य एटीट्यूड के बीच में हमारी सोच क्या है, जो योग्य एटीट्यूड होने नहीं देती, और उस सोच को कैसे सही करना है। समझ के सही करना है। तो यह अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा और तीसरा हिस्सा होता है लर्निंग का। योग्य एटीट्यूड या मानसिकता डेवलप करें। तो दोस्तों, आप कहेंगे कि यह कैसा संभव है? हम यह खुद कैसा कर सकते हैं? तो दोस्तों, मैंने आपको दिशा दी है। तो इस पर से आप खुद भी यह चीजें कर सकते हैं। थोड़ा वक्त जरूर लग सकता है। मैंने इन चीजों पर काम करके एक कोर्स डेवलप किया है, जो इन तीनों चीजों को डिटेल्स में जाकर आपसे करवाता है। इसके मराठी, हिंदी और इंग्लिश में प्री-रिकॉर्डेड सेमिनार्स रखे हैं वेबसाइट पर, जिनमें। चीज में आप महारत हासिल कर सको। तो यह आपको सेल्फ स्टडी लर्निंग मेथड डॉट कॉम वेबसाइट पर मिलेगा। यहां से आप प्री-रिकॉर्डेड कोर्सेस या लाइव सेमिनार भी परचेस कर सकते हैं, जो आठ दिन लाइव चलेगा एक बैच के लिए। तो इस सेमिनार से आप आपके एटीट्यूड में बदलाव, पद्धति में बदलाव, और लर्निंग की डिफिकल्टीज रिमूव करना। अड़चनें निकालना। यह आप खुद कर सकेंगे। और इन सब के बदौलत लर्निंग की गति कई गुना बढ़ा पाएंगे। तो साल भर का काम कुछ महीनों में हो सकता है। तो विजिट कीजिए, आपका कोर्स बुक कीजिए। एक-एक चीज को पढ़ाई में अप्लाई कीजिए। और फिर बाद में लाइव या रिकॉर्डेड प्रैक्टिस में हिस्सा लीजिए। तो आप परफेक्ट हो जाएंगे।

Dr. sandeep kharat
Dr. Sandeep Kharat (MBBS), Self Learning Study Method Coach.